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योगासन व प्राणायाम करते समय क्या -क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

https://link.amazon/B0accNEgj योगासन व प्राणायाम करते समय क्या -क्या सावधानी बरतनी  सबसे पहली सावधानी नं योग व प्राणायाम केवल सुबह के समय ही किया जा सकता है। शरीर पूर्ण रूप से दैनिक क्रिया क्रम से निवृत्त हो लेना चाहिए। स्नान उपरांत पंच तत्वों को जल अर्पण करना अनिवार्य है। एक स्वच्छ आसन जो शारीरिक ऊर्जा का विस्थापन निरोधक होना चाहिए। मुख केवल पूर्व दिशा में रख कर पांच मिनट सूर्य नमस्कार मुद्रा में शारीरिक एक बार ऊर्जा संयमित अपने शरीर में करनी चाहिए। फिर पद्मासन या सुखासन में पूर्व दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। आपकी मेरूदंड बिल्कुल सीधी रखें। शरीर का भार नितम्बों पर रहे। यह चैक करें की आपके दोनों स्वर चल रहें। आपकी गर्दन सीधी रखें आपकी दृष्टि भूमि के समानांतर रहे। आंखों को धीरे-धीरे बंद करे, बाकि शरीर स्थिर रख कर अन्तर मन चेतन करें। ताकि आपका ध्यान पूरे समय भटक न जाए। जब सांसों , दृष्टि व अन्तर मन में सामंजस्य स्थापित हो जाये तो धीरे-धीरे आंखें खोले। यदि सामंजस्य स्थापित नही हो तो उस दिन प्राणायाम व योग न करें। सबसे पहले कुम्भक करें। फिर रेचक और पूरक के क्रम में प्राणायाम करें। इसको...

श्वेत प्रदर की बिमारी का इलाज

https://link.amazon/B0esBFH66  आजकल औरतों की एक आम बन चुकी समस्या, जो एक उग्र रोग का रुप धारण कर चुकी है। समस्या आरंभ काल में नगण्य थी। कालांतर में एक विशेष व्याधि बन गई। जिसके इतिहास में महाभयंकर परिणाम भोगने पड़ते, मनुष्य जाति को। यदि इतिहास में जा कर देखा जाये तो बहुत ही रोचक व अज्ञानता, वैमनस्य, कामना और प्रताड़ना का प्रतिरूप इस बिमारी के उपहार स्वरूप मानवता के कर्म उनकी झोली में वेदनाओं की गाथा लिख रहे हैं। यदि शारीरिक कमजोरी को छोड़कर देखा जाए तो इसका महत्त्वपूर्ण कारण ज्योतिष में छिपा बैठा है। साफ़ साफ़ शब्दों में उल्लेख किया जाये तो बच्चों की कुण्डली दोष मिलान , एक विशेष जिम्मेदार पहलू हैं। यदि कुंडली मिलान गलत कर दिया। दोनों की योनि एक नहीं हुई तो यह व्याधि यहां भयंकर परिणाम भोगने पर मजबूर कर देती है। दूसरा दोष गण दोष , यदि ये दो दोष विवाहित जोड़े में हैं तो यह बिमारी शत-प्रतिशत औरत व पुरुष को मिलेगी। पुरुष की बिमारी का नाम अलग है कारण रुप एक से है।  काम जनित असन्तोषजनक व्यवहार कुंडलियों का सही मिलान न होना। जिसमें दोनों का हर प्रकार मनमुटाव गलत योनि मिलान है। मैं एक ...

हमारे दांत व मसूड़े क्यों खराब होते हैं?

 दांत और मसूड़े खराब होने की सबसे बड़ी वजह मुंह की सही सफाई न होना और गलत खान-पान है। जब खाने के बारीक कण दांतों में फंसे रह जाते हैं, तो बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो इनेमल और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके मुख्य कारणों को दो भागों में समझा जा सकता है:--  1. दांत खराब (सड़ने या टूटने) के कारण बैक्टीरिया और एसिड (Plaque & Acid) मीठा, स्टार्च (जैसे चिप्स, ब्रेड) या चिपचिपा खाना खाने के बाद जब सफाई नहीं होती, तो बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं। यह एसिड दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) को गलाकर कैविटी (कीड़ा) बना देता है। जरूरत से ज्यादा मीठा और चिपचिपा खाना:--       काफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट या प्रोसेस्ड फूड दांतों पर चिपके रहते हैं, जिससे सड़न तेजी से फैलती है। कड़क चीजें चबाना या दांत घिसना: ---                          बर्फ, सुपारी, अखरोट के छिलके दांतों से तोड़ना या रात में तनाव में दांत पीसने (Bruxism) से दांत चटक या टूट जाते हैं। फ्लोराइड की कमी:---          ...

दांतों में कीड़ा लगने की रोकथाम

https://link.amazon/B02YdLjG2  दांत मनुष्य के शरीर की अनमोल धरोहर है जिसको सहेज कर रखना, मनुष्य का परम कर्तव्य है। दांत गये तो जहान गया, यह हमारी महत्वपूर्ण कहावत है। इसका अर्थ सीधा सा है आदमी जवानी में प्रोढ़  नजर आने लगता है। आदमी मायूस हो जाता है। सारा दिन इसी चिंता में घुल कर कमजोर व मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने लगता है, अपनी जिंदगी को नरक बना लेता है।। अपनी थोड़ी सी कमी के कारण सारी जिंदगी अपाहिज व रोगी बन कर समय व्यतीत करता है। यदि उसने समय पर अपने बेशकिमती कुदरती मोतीयों की सही देखभाल की होती तो क्या यह हालात आज उसके सामने उसका उपहार नहीं करते होते। हम दर्पण तो हररोज निहारते हैं कुछ सैंकड बिना दर्द हुए, अपने मुंह में झांक लिया होता तो समय पर काले हो रहे बेशकिमती तोहफों का कालेपन को दूर करवा लिया होता, आगे पल्ले गांठ बांध लेना, बालों को संवारने के समय ही अपने मुंह के अन्दर भी निहार लेना ताकि आपको समय पर आपके दुश्मन का पता चल सके कि कहां छुपा बैठा है। कब मोका मिले तेरी चीख निकलवा सके। यदि दांतों में कालापन नजर आए तो तुरंत अपने डाक्टर के पास जाकर अपने दांतों में बना कालापन ह...