आजकल भाग-दौड़ की जिन्दगी में अपने आप को मनुष्य भुल गया है कि वह भी मनुष्य है वह एक मशीन से ज्यादा काम करता है। मशीन की जिंदगी तो बहुत आराम दायक है उसकी देखभाल करने वालों की संख्या बहुत है एक को ढूंढोगे के तो हजार मिलेंगे। बहुत आराम करती है मशीन। जब तक आप उसको काम करने को नहीं कहोगे तो वह कार्य नहीं करेगी। मशीन को काम का आदेश देने के लिए, हमें कम से कम 2 घंटे पहले उठना पड़ता है और एक घंटे बाद तक काम अधिक करना पड़ता है। है न मशीन की मौज। मशीन की गारंटी व वारंटी भी मिलती है। मशीन के डाक्टर जब तक नहीं पहुंच जाये तब तक वह आराम फरमाती है।
मशीन की तुलना में मनुष्य की न तो गारंटी है ना ही वारंटी है। मशीन की तकलीफ़ तक मनुष्य की हालत बिगाड़ देती है। मशीन के डाक्टर यानि मकैनिक का चलकर आना पड़ता है जबकि मनुष्य को डाक्टर के पास चलकर जाना पड़ता है। मशीन को नम्बर नहीं लगाना पड़ता है। मनुष्य को कयी बार लाइन में खड़े रहने के बाद तकलीफ समेत वापस आना पड़ता है। मशीन अधिकतर मामलों में एक बार में स्वस्थ हो जाती है जबकि मनुष्य को बहुत बार डाक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं मनुष्य की इस तरीके से तकलीफ और बढ़ जाती है जबकि मशीन बिल्कुल आराम करती है। अतः इस भाग दौड़ की जिंदगी में अपने लिए कुछ क्षण भर रोज अपने स्वास्थ्य के लिए अवश्य निर्धारित रखें ताकि मशीन न बन जाएं।
सूरज निकलने से पहले उठे। अपने दोनों हाथों को अवश्य चूमें। उनकी ता उम्र सलामती की प्रार्थना भगवान व पृथ्वी माता से करें। कि मैं कभी भी आपके उपर स्थिर भार बनकर न रहूं। मेरा सम्पूर्ण शरीर स्वस्थ रखें ताकि मैं आप पर बोझ बन कर न रहूं। हाथ मूंह धोकर , दिनचर्या से निवृत्त होकर,बाहर खुले में घूमने अवश्य जाएं ताकि तनाव मुक्त जीवन जी सकें। थोड़ी सी कसरत, प्राणायाम अवश्य करें। इससे शरीर का अंग प्रत्यंग स्वस्थ व निरोग रहता है। बढ़ती उम्र को घटाने के लिए नींबू पानी हर रोज पीये। इससे शरीर में सुफुर्ती आती है व हड्डियां मजबूत होती है। अपने को मानसिक रूप से हमेशा जवान समझे, चाहे आपकी उम्र सौ वर्ष को भी पार कर चुकी हो।
समय की तंगहाली में अपने स्वयं की जिंदगी के लिए समय अवश्य अलग से रखें। कभी खराब मशीन बनने की तो कभी सोचना भी नहीं चाहिए।आपको चारपाई के लिए नहीं बनायें। चारपाई आपके लिए होनी चाहिए। यदि आप ऐसा सोचते हैं तो समय एक ऐसा वैध है जो शरीर में कोई विकार पैदा तक नहीं होने देता है। समय अनमोल धरोहर है जो हर सैकंड समाप्त होती रहती है। परमात्मा ने इस पूंजी को आपके जन्म से पहले ही जमा कर आपके खाते में डाल दी थी। जन्म ले ये ही उसका खाता और जन्म के सेविंग अकाउंट में खुल जाता है। यह सब आप पर निर्भर करता है कि इस जन्म से ज्यादा पूंजी होगी या कम अगले जन्म के लिए। समय ही वह बैंक है जो हर सैकंड आपको कुछ न कुछ देता रहता है। कभी कम तो कभी ज्यादा।
देता अवश्य है। क्या आप बता सकते हैं कि समय हर रोज हर सैकंड क्या क्या देता है। क्या इस अनोखे, अनमोल बैंक की देनदारी से खुश हैं। आपको रुपयों से कितना नवाजा गया है। इसके अनमोल उपहारों को ठुकराना मत , बेशकिमती तोहफा होते हैं। यदि आपकी नजर सही होगी तो आप समझ गए होंगे, नहीं तो बहुत ही कठिन प्रश्न है समझना मुश्किल हो सकता है। अपनी नज़र सीधी रखिए व जानिए समय का खजाना कहां छुपा है। ढूंढ निकालने की कोशिश अवश्य करें। अपनी राय से अवश्य अवगत करायें।
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