आजकल काम किसी के पास नहीं है जो था वह करोना की भेंट चढ़ा दिया। जैसे भगवान के भोग लगाते समय किया जाता हैष जो कुछ है सब पूजा में रख दिया । सब करोना ने खा लिया। अब भगवान की ओर आंखे फाड़ कर लखाने लगे है।
राजनेता लोग भी बेरोजगार हो गये, वे करोना के जमाने के डाकू मलखान सिंह व गब्बर सिहं बन गये हैं उन्हीं की तरज पर मुंह पर कपड़ा लपेट दूसरे राजनेतासे गद्दी लुटने का पुरा महा भारत के चक्करव्यूह की रचना कर, दिन दहाड़े लूटते रहते हैं।
है तो कईराज्यों में लेकिन राजस्थान की घटना ताजा और सरकार गिराने का धंधा करने वालों का सटीक उदाहरण है। पजामें से पैर बाहर होते ही सरकार गिराने चल पड़ते हैं। पहले चलना तो सिखना चाहिये, कही घुटनों के बल न चलना पड़े।
चुनाव घोषणा हो ते ही चाहे अगले दिन बिना देश का एक पैसा खर्च किए चुनाव कराए जा सकते हैं बिना किसी दुःख व दुविधा के। जैसे ही पार्टी अपने उम्मीदवारों का चयन कर लें तभी चुनाव घोषित किए जाने चाहिए। केवल जितनी पार्टी है उतने ही मास्टर कम्प्यूटर चाहिए,हर एक पार्टी को चुनाव आयोग के साथ में ताकि चुनाव आयोग गड़बड़ी न कर सके। मोबाइल फोन से वोटर को आधार कार्ड से के नं से वोटिंग करवा लें। केवल एक दिन ही सबको शिक्षित किया जा सकता है इस बारे में। सारी पार्टीयों को अपने दफ्तर के कम्प्यूटर पर उसी दिन बिना गिनती किये पता चल जाएगा कि कितने वोट किस पार्टी को मिले हैं। चुनाव आयोग का कार्य केवल उन सभी के कम्प्यूटर के डाटा को इकट्ठा करना पड़ेगा यह बताने को कि कितने प्रतिशत मतदान हुआ है। बाकी काम पार्टी के कम्प्यूटर कर लेंगे। फूटी कोड़ी तक सरकार की नहीं होगी। चाहे तो कार्य काल समाप्त होने से पहले ही चुनाव सम्पन्न बिना किसी सुरक्षा बल के किया जा सकता है। किसी अधिकारी व कर्मचारी को कोटा पैसा तक सरकार को नहीं देना पड़ेगा टी ए, डी ए के रूप में। बस बेइमानों को दुःख होगा कि वे धांधली व बेईमानी न कर सके। ...
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