आज ८ अप्रैल ५८/५९ दिवस बृहस्पतिवार है। ज्योतिष व गृहों की गणना के अनुसार बकरी ईद १० अप्रैल को है। बकरी ईद का महत्व यह है कि इस दिन मुसलमान धर्म में मरने वाले की अन्तिम इच्छा लिखी , पढ़ी व इबादत की जाती है ताकि मरने वाली के शरीर को खाक ए सुपर्द कर दिया जाये।
आजकल भाग-दौड़ की जिन्दगी में अपने आप को मनुष्य भुल गया है कि वह भी मनुष्य है वह एक मशीन से ज्यादा काम करता है। मशीन की जिंदगी तो बहुत आराम दायक है उसकी देखभाल करने वालों की संख्या बहुत है एक को ढूंढोगे के तो हजार मिलेंगे। बहुत आराम करती है मशीन। जब तक आप उसको काम करने को नहीं कहोगे तो वह कार्य नहीं करेगी। मशीन को काम का आदेश देने के लिए, हमें कम से कम 2 घंटे पहले उठना पड़ता है और एक घंटे बाद तक काम अधिक करना पड़ता है। है न मशीन की मौज। मशीन की गारंटी व वारंटी भी मिलती है। मशीन के डाक्टर जब तक नहीं पहुंच जाये तब तक वह आराम फरमाती है। मशीन की तुलना में मनुष्य की न तो गारंटी है ना ही वारंटी है। मशीन की तकलीफ़ तक मनुष्य की हालत बिगाड़ देती है। मशीन के डाक्टर यानि मकैनिक का चलकर आना पड़ता है जबकि मनुष्य को डाक्टर के पास चलकर जाना पड़ता है। मशीन को नम्बर नहीं लगाना पड़ता है। मनुष्य को कयी बार लाइन में खड़े रहने के बाद तकलीफ समेत वापस आना पड़ता है। मशीन अधिकतर मामलों में एक बार में स्वस्थ हो जाती है जबकि मनुष्य को बहुत बार डाक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं मनुष्य की इस तरीके से तकलीफ...
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