पाबड़ा पिण्ड जो पंजाब में था उस का नाम बदल कर मोहम्मद पुर उर्फ मोडा खेड़ा रख दिया गया था मुन्शी व उसके गलत बेटों के द्वारा, गलत कारनामे करने के लिए जिसमें लोगों की बहु व बेटियों की इज्जत लूटने के लिए किया था
बदल कर वापिस पाबड़ा रख दिया जाये। नहीं तो लोगों की बहु बेटियों की इज्जत खतरे में है। इस गैंग में बहुत सी जातियां पूर्ण रूप से शामिल है। सबसे ज़्यादा जाति बनिया व चमार तथा चूड़ा जाति के लोग है।
उन्होंने ने अपनी जाति बदल कर गलत जाति के प्रमाण पत्र बनवा कर, चोरी,डकेती और बलात्कार जैसे घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसमें मिणा जाति सिरमौर बनी हुई है। वे बाबे व भिखारी के रूप में रहते हैं।
कुछ पंछी प्रजाति के लोग भी धड़ल्ले से इन कार्यक्रमों को अन्जाम देते हैं सरकार मुक व बधीर बनी हुई है। समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो भंयकर परिणाम भोगने पड़ेगें। यदि नाम पता चाहिए तो मैं पूर्ण जानकारी प्रैष में दे सकता हूं।
आजकल भाग-दौड़ की जिन्दगी में अपने आप को मनुष्य भुल गया है कि वह भी मनुष्य है वह एक मशीन से ज्यादा काम करता है। मशीन की जिंदगी तो बहुत आराम दायक है उसकी देखभाल करने वालों की संख्या बहुत है एक को ढूंढोगे के तो हजार मिलेंगे। बहुत आराम करती है मशीन। जब तक आप उसको काम करने को नहीं कहोगे तो वह कार्य नहीं करेगी। मशीन को काम का आदेश देने के लिए, हमें कम से कम 2 घंटे पहले उठना पड़ता है और एक घंटे बाद तक काम अधिक करना पड़ता है। है न मशीन की मौज। मशीन की गारंटी व वारंटी भी मिलती है। मशीन के डाक्टर जब तक नहीं पहुंच जाये तब तक वह आराम फरमाती है। मशीन की तुलना में मनुष्य की न तो गारंटी है ना ही वारंटी है। मशीन की तकलीफ़ तक मनुष्य की हालत बिगाड़ देती है। मशीन के डाक्टर यानि मकैनिक का चलकर आना पड़ता है जबकि मनुष्य को डाक्टर के पास चलकर जाना पड़ता है। मशीन को नम्बर नहीं लगाना पड़ता है। मनुष्य को कयी बार लाइन में खड़े रहने के बाद तकलीफ समेत वापस आना पड़ता है। मशीन अधिकतर मामलों में एक बार में स्वस्थ हो जाती है जबकि मनुष्य को बहुत बार डाक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं मनुष्य की इस तरीके से तकलीफ...
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