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योगासन व प्राणायाम करते समय क्या -क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

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योगासन व प्राणायाम करते समय क्या -क्या सावधानी बरतनी 

सबसे पहली सावधानी नं


योग व प्राणायाम केवल सुबह के समय ही किया जा सकता है।

शरीर पूर्ण रूप से दैनिक क्रिया क्रम से निवृत्त हो लेना चाहिए।

स्नान उपरांत पंच तत्वों को जल अर्पण करना अनिवार्य है।

एक स्वच्छ आसन जो शारीरिक ऊर्जा का विस्थापन निरोधक होना चाहिए।

मुख केवल पूर्व दिशा में रख कर पांच मिनट सूर्य नमस्कार मुद्रा में शारीरिक एक बार ऊर्जा संयमित अपने शरीर में करनी चाहिए।

फिर पद्मासन या सुखासन में पूर्व दिशा में मुंह करके बैठ जाएं।

आपकी मेरूदंड बिल्कुल सीधी रखें। शरीर का भार नितम्बों पर रहे।

यह चैक करें की आपके दोनों स्वर चल रहें।

आपकी गर्दन सीधी रखें आपकी दृष्टि भूमि के समानांतर रहे।

आंखों को धीरे-धीरे बंद करे, बाकि शरीर स्थिर रख कर अन्तर मन चेतन करें। ताकि आपका ध्यान पूरे समय भटक न जाए।

जब सांसों , दृष्टि व अन्तर मन में सामंजस्य स्थापित हो जाये तो धीरे-धीरे आंखें खोले। यदि सामंजस्य स्थापित नही हो तो उस दिन प्राणायाम व योग न करें।

सबसे पहले कुम्भक करें। फिर रेचक और पूरक के क्रम में प्राणायाम करें। इसको करते समय शरीर पर अधिक किसी प्रकार का जोर जबरदस्ती अधिक समय तक कुम्भक लगाने की कोशिश न करें। जिससे छोटी आंत व मूलाधार पर अधिक दबाव से ऊपर की तरफ सरक जाता है। जो एक भयानक पीड़ादायक व्याधि में तब्दील हो सकता है। स्पलीन,व यकृत दोष उत्पन्न हो कर पांडु रोग में बदल सकता है।

सांस धीरे-धीरे छोड़ें। व रेचक में जाने में भी धीरे धीरे पूरी सांस निकाल देकर , जितनी देर आराम से स्तम्भन लगायें। शुरू में शरीर में शौध उत्पन्न से पहले ही सांस धीरे-धीरे ऊपर खींचे।

यदि इस क्रिया में जोर से सांस चली गई तो आपका पाचन तंत्र गड़बड़ा जायेगा।

पूरक में तो सांस केवल मध्य अवस्था में रोक कर रखे। साधारण गति से करें ,आंखें बंद होनी चाहिए।

आरम्भ में पांच मिनट करें, बाद में धीरे-धीरे एक घंटे की अवधि तक ले जायें।

प्राणायाम की ये सावधानियां अवश्य ध्यान मुद्रा में रखनी चाहिए।

जानकारी कैसी लगी , क्या आप ये सावधानियां बरततें हो , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त अवश्य करें। अपने सुझाव अवश्य लिखें।

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